Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.25.4: राजा धृतराष्ट्र शांतिप्रिय हैं (युद्ध नहीं चाहते)। उन्होंने शीघ्रता से मेरे लिए रथ तैयार करवाया और मुझे यहाँ भेज दिया। मैं चाहता हूँ कि राजा धृतराष्ट्र का यह शांति-संदेश उनके भाइयों, पुत्रों और सम्बन्धियों सहित पांडवों को प्रिय लगे और दोनों पक्षों में संधि स्थापित हो जाए॥ 4॥ | mahabharat अध्याय 5.25: संजयका युधिष्ठिरको धृतराष्ट्रका संदेश सुनाना एवं अपनी ओरसे भी शान्तिके लिये प्रार्थना करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा धृतराष्ट्र शांतिप्रिय हैं (युद्ध नहीं चाहते)। उन्होंने शीघ्रता से मेरे लिए रथ तैयार करवाया और मुझे यहाँ भेज दिया। मैं चाहता हूँ कि राजा धृतराष्ट्र का यह शांति-संदेश उनके भाइयों, पुत्रों और सम्बन्धियों सहित पांडवों को प्रिय लगे और दोनों पक्षों में संधि स्थापित हो जाए॥ 4॥
King Dhritarashtra respects peace (does not want war). He hastily got a chariot prepared for me and sent me here. I want that this message of peace from King Dhritarashtra along with his brothers, sons and relatives may be liked by the Pandavas and a treaty may be established between the two sides.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥