इतना ही नहीं, यदि मैं अर्जुन से प्राण भी मांग लूं, तो वह प्राण भी दे सकता है, फिर अन्य किसी विषय में क्या कहना है? विद्वान राजा युधिष्ठिर! मैं यह सब संधि की सफलता के लिए ही कह रहा हूँ। भीष्म और राजा धृतराष्ट्र भी यही मत रखते हैं और इससे आप सभी को उत्तम शांति प्राप्त हो सकती है॥ 15॥
Not only this, Arjuna can even give his life if I ask for it, then what is there to say about anything else? Learned King Yudhishthira! I am saying all this only for the success of the treaty. Bhishma and King Dhritarashtra also have the same opinion and with this all of you can get the best peace.॥ 15॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि संजययानपर्वणि संजयवाक्ये पञ्चविंशोऽध्याय:॥ २५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत संजययानपर्वमें संजयवाक्यविषयक पचीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥