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श्लोक 5.195.19  |
वणिजो गणिकाश्चारा ये चैव प्रेक्षका जना:।
सर्वांस्तान् कौरवो राजा विधिवत् प्रत्यवैक्षत॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| कुरुराज दुर्योधन वहाँ आने वाले समस्त वणिकों, गणिकाओं, गुप्तचरों और दर्शकों का उचित ध्यान रखता था ॥19॥ |
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| Kururaj Duryodhana used to take proper care of all the merchants, courtesans, spies and spectators who used to come there. 19॥ |
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इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि अम्बोपाख्यानपर्वणि कौरवसैन्यनिर्याणे पञ्चनवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत अम्बोपाख्यानपर्वमें कौरव-सेनाका युद्धके लिये प्रस्थानविषयक एक सौ पंचानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९५॥
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