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श्लोक 5.193.7  |
एतदिच्छाम्यहं ज्ञातुं परं कौतूहलं हि मे।
हृदि नित्यं महाबाहो वक्तुमर्हसि तन्मम॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| महाबाहो! मैं यह जानना चाहता हूँ, इसके लिए मेरे हृदय में सदैव बड़ी जिज्ञासा रहती है। कृपया मुझे यह बताने की कृपा करें।॥7॥ |
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| Mahabaho! I want to know this, there is always a great curiosity in my heart for this. Please be kind enough to tell me this.'॥ 7॥ |
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