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श्लोक 5.193.15-16  |
संजय उवाच
श्रुत्वा भीष्मस्य तद् वाक्यं राजा दुर्योधनस्तत:।
पर्यपृच्छत राजेन्द्र द्रोणमङ्गिरसां वरम्॥ १५॥
आचार्य केन कालेन पाण्डुपुत्रस्य सैनिकान्।
निहन्या इति तं द्रोण: प्रत्युवाच हसन्निव॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| संजय ने कहा - राजन ! भीष्म के ये वचन सुनकर राजा दुर्योधन ने अंगिरस ब्राह्मणों में श्रेष्ठ द्रोणाचार्य से पूछा - 'आचार्य ! आप पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर के सैनिकों को कितने समय में मार सकते हैं ?' यह प्रश्न सुनकर द्रोणाचार्य मुस्कुराये और बोले - ॥15-16॥ |
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| Sanjaya said - King! On hearing these words of Bhishma, king Duryodhana asked Dronacharya, the best of the Angiras Brahmins - 'Acharya! In how much time can you kill the soldiers of Pandu's son Yudhishthira?' On hearing this question, Dronacharya smiled and said -॥15-16॥ |
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