श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 190: हिरण्यवर्माके आक्रमणके भयसे घबराये हुए द्रुपदका अपनी महारानीसे संकटनिवारणका उपाय पूछना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.190.4 
तत: सम्प्रेषयामास मित्राणाममितौजसाम्।
दुहितुर्विप्रलम्भं तं धात्रीणां वचनात् तदा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा ने अपनी दासियों के कहने पर अपने महान मित्र राजाओं को यह समाचार भेजा कि द्रुपद ने मेरी पुत्री को छल से हर लिया है ॥4॥
 
Thereafter the king, as told by his nurses, sent the news that his daughter had been deceived by Drupada to his illustrious friend kings. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)