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mahabharat 5.190.16-17: ऐसा सोचकर वे यह मानने लगे हैं कि मैं ठगा गया हूँ, इसलिए वे अपने मित्रों, सैनिकों और सेवकों के साथ आकर बड़े प्रयत्न से मुझे उखाड़ना चाहते हैं। सुश्रोणि! यहाँ क्या सत्य है और क्या असत्य? शोभने! आप मुझे यह बताइए। आपके मुख से निकले हुए शुभ वचनों को सुनकर मैं वैसा ही करूँगा।॥ 16-17॥   |   mahabharat अध्याय 5.190: हिरण्यवर्माके आक्रमणके भयसे घबराये हुए द्रुपदका अपनी महारानीसे संकटनिवारणका उपाय पूछना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 190: हिरण्यवर्माके आक्रमणके भयसे घबराये हुए द्रुपदका अपनी महारानीसे संकटनिवारणका उपाय पूछना  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  5.190.16-17 
इति संचिन्त्य यत्नेन समित्र: सबलानुग:।
वञ्चितोऽस्मीति मन्वानो मां किलोद्धर्तुमिच्छति॥ १६॥
किमत्र तथ्यं सुश्रोणि मिथ्या किं ब्रूहि शोभने।
श्रुत्वा त्वत्त: शुभं वाक्यं संविधास्याम्यहं तथा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
ऐसा सोचकर वे यह मानने लगे हैं कि मैं ठगा गया हूँ, इसलिए वे अपने मित्रों, सैनिकों और सेवकों के साथ आकर बड़े प्रयत्न से मुझे उखाड़ना चाहते हैं। सुश्रोणि! यहाँ क्या सत्य है और क्या असत्य? शोभने! आप मुझे यह बताइए। आपके मुख से निकले हुए शुभ वचनों को सुनकर मैं वैसा ही करूँगा।॥ 16-17॥
 
‘Thinking this, they have started to believe that I have been deceived and therefore they come with their friends, soldiers and servants and want to uproot me with great effort. Sushroni! What is true and what is false here? Shobhane! You tell me this. After listening to the good words coming from your mouth, I will do the same.॥ 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)