श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 19: युधिष्ठिर और दुर्योधनके यहाँ सहायताके लिये आयी हुई सेनाओंका संक्षिप्त विवरण  »  श्लोक 14-16h
 
 
श्लोक  5.19.14-16h 
तथैव धार्तराष्ट्रस्य हर्षं समभिवर्धयन्॥ १४॥
भगदत्तो महीपाल: सेनामक्षौहिणीं ददौ।
तस्य चीनै: किरातैश्च काञ्चनैरिव संवृतम्॥ १५॥
बभौ बलमनाधृष्यं कर्णिकारवनं यथा।
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार राजा भगदत्त ने दुर्योधन का हर्ष बढ़ाने के लिए उसे एक अक्षौहिणी सेना दी। चीन और किरात देशों के स्वर्ण-शरीरधारी योद्धाओं से भरी हुई भगदत्त की वह भयंकर सेना कनेर के वृक्षों के वन के समान शोभा पा रही थी।
 
Similarly, King Bhagadatta, to increase Duryodhan's joy, gave him an Akshauhini army. Bhagadatta's fierce army, filled with golden-bodied warriors from China and Kirata countries, looked like a forest of oleander trees. 14-15 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)