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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 186: अम्बाकी कठोर तपस्या  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.186.3 
एषा मे परमा शक्तिरेतन्मे परमं बलम्।
यथेष्टं गम्यतां भद्रे किमन्यद् वा करोमि ते॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यही मेरी अधिकतम शक्ति और बल है। हे प्रिये! अब आप जहाँ चाहें जाएँ, अथवा मुझे बताएँ कि मैं आपका दूसरा कौन-सा कार्य करूँ?॥3॥
 
This is the maximum power and strength I have. O dear! Now go wherever you wish, or tell me which other task of yours should I accomplish?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)