Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.186.23: इस प्रकार बारह वर्षों तक कठोर तप करके उसने पृथ्वी और आकाश को क्षुब्ध कर दिया। उसकी जाति के लोगों ने आकर उसे उस कठोर व्रत को रोकने का प्रयत्न किया; परन्तु वे सफल न हो सके॥23॥ | mahabharat अध्याय 5.186: अम्बाकी कठोर तपस्या । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं द्वादश वर्षाणि तापयामास रोदसी।
निवर्त्यमानापि च सा ज्ञातिभिर्नैव शक्यते॥ २३॥
अनुवाद
इस प्रकार बारह वर्षों तक कठोर तप करके उसने पृथ्वी और आकाश को क्षुब्ध कर दिया। उसकी जाति के लोगों ने आकर उसे उस कठोर व्रत को रोकने का प्रयत्न किया; परन्तु वे सफल न हो सके॥23॥
Thus, by engaging in rigorous penance for twelve years, he infuriated the earth and the sky. People of his caste came and tried to make him stop that rigorous vow; but they could not succeed.॥23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥