श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.185.8 
ततो रामो हृषितो राजसिंह
दृष्ट्वा तदस्त्रं विनिवर्तितं वै।
जितोऽस्मि भीष्मेण सुमन्दबुद्धि-
रित्येव वाक्यं सहसा व्यमुञ्चत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैंने प्रस्वप्नास्त्र उतार दिया है - यह देखकर परशुरामजी बहुत प्रसन्न हुए। अचानक उनके मुख से ये शब्द निकले - 'भीष्म ने मुझ मंदबुद्धि को परास्त कर दिया है।'
 
O King! I have taken off the Prasvapnaastra - seeing this Parashurama was very happy. Suddenly these words came out of his mouth - 'Bheeshma has defeated me, who is a dim-witted person'.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd