श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.185.7 
ततश्च प्रतिसंहृत्य तदस्त्रं स्वापनं महत्।
ब्रह्मास्त्रं दीपयांचक्रे तस्मिन् युधि यथाविधि॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तब मैंने उस महान प्रस्वपनास्त्र को अपने धनुष से उतार लिया और उस युद्ध में विधिपूर्वक ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया ॥7॥
 
Then I took down that great Prasvapanastra from my bow and in that war I used the Brahmastra as per the prescribed method. ॥ 7॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd