Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.185.3: कुरुनन्दन! ये स्वर्ग के देवता आकाश में खड़े हैं। वे सभी इस समय तुम्हें प्रस्वपनास्त्र का प्रयोग न करने का निषेध कर रहे हैं। 3॥   |   mahabharat अध्याय 5.185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.185.3 
एते वियति कौरव्य दिवि देवगणा: स्थिता:।
ते त्वां निवारयन्त्यद्य प्रस्वापं मा प्रयोजय॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! ये स्वर्ग के देवता आकाश में खड़े हैं। वे सभी इस समय तुम्हें प्रस्वपनास्त्र का प्रयोग न करने का निषेध कर रहे हैं। 3॥
 
Kurunandan! These gods of heaven are standing in the sky. All of them are forbidding you at this time not to use Prasvapanastra. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)