श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  5.185.17-18h 
वयं तु गुरवस्तुभ्यं तस्मात् त्वां वारयामहे॥ १७॥
भीष्मो वसूनामन्यतमो दिष्टॺा जीवसि पुत्रक।
 
 
अनुवाद
पुत्र परशुराम! हम तुम्हारे गुरु और पूज्य पूर्वज हैं। इसीलिए हम तुम्हें रोक रहे हैं। पुत्र! भीष्म वसुओं में से एक हैं। इसे अपना सौभाग्य समझो कि उनसे युद्ध करने के बाद भी तुम जीवित हो। 17 1/2।
 
Son Parashuram! We are your teachers and respected ancestors. That is why we are stopping you. Son! Bhishma is one of the Vasus. Consider it your good fortune that you are still alive after fighting with him. 17 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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