श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 185: देवताओंके मना करनेसे भीष्मका प्रस्वापनास्त्रको प्रयोगमें न लाना तथा पितर, देवता और गंगाके आग्रहसे भीष्म और परशुरामके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.185.12 
इदं निमित्ते कस्मिंश्चिदस्माभि: प्रागुदाहृतम्।
शस्त्रधारणमत्युग्रं तच्चाकार्यं कृतं त्वया॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यह बात हमने पहले भी तुमसे कही थी। शस्त्र उठाना बड़ा भयंकर कर्म है; अतः तुमने यह अवांछनीय कार्य किया है॥12॥
 
We had told you this on some earlier occasion also. Taking up arms is a very dreadful deed; hence you have done an undesirable act.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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