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mahabharat 5.181.8: उन शक्तियों को सब दिशाओं से आते हुए, अनेक रूप धारण किए हुए, प्रलयकाल के बारह सूर्यों के समान भयंकर तेज से प्रकाशित और अग्नि की प्रचण्ड ज्वालाओं के समान प्रज्वलित होते हुए देखकर मैं अत्यन्त व्याकुल हो गया॥8॥   |   mahabharat अध्याय 5.181: भीष्म और परशुरामका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 181: भीष्म और परशुरामका युद्ध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.181.8 
किं त्वेवाहं विह्वल: सम्प्रदृश्य
दिग्भ्य: सर्वास्ता महोल्का इवाग्ने:।
नानारूपास्तेजसोग्रेण दीप्ता
यथाऽऽदित्या द्वादश लोकसंक्षये॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उन शक्तियों को सब दिशाओं से आते हुए, अनेक रूप धारण किए हुए, प्रलयकाल के बारह सूर्यों के समान भयंकर तेज से प्रकाशित और अग्नि की प्रचण्ड ज्वालाओं के समान प्रज्वलित होते हुए देखकर मैं अत्यन्त व्याकुल हो गया॥8॥
 
Seeing those Shaktis coming from all directions, having many forms, radiating with dreadful brilliance like the twelve Suns of the time of doomsday and blazing like the fierce flames of fire, I became extremely agitated. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)