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mahabharat 5.180.31-32h: महाबाहु! तत्पश्चात् मैंने भी शीघ्रतापूर्वक ऐसे अस्त्रों का प्रयोग आरम्भ कर दिया, जो युद्धभूमि में विपक्षियों की गति को रोक देते थे। मेरे और परशुराम के बाण आकाश में सर्वत्र फैलकर बीच में ही रुक जाते थे। 31 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.180: भीष्म और परशुरामका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 180: भीष्म और परशुरामका घोर युद्ध  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  5.180.31-32h 
ततोऽहमपि शीघ्रास्त्रं समरप्रतिवारणम्।
अवासृजं महाबाहो तेऽन्तराधिष्ठिता: शरा:॥ ३१॥
रामस्य मम चैवाशु व्योमावृत्य समन्तत:।
 
 
अनुवाद
महाबाहु! तत्पश्चात् मैंने भी शीघ्रतापूर्वक ऐसे अस्त्रों का प्रयोग आरम्भ कर दिया, जो युद्धभूमि में विपक्षियों की गति को रोक देते थे। मेरे और परशुराम के बाण आकाश में सर्वत्र फैलकर बीच में ही रुक जाते थे। 31 1/2॥
 
Great arms! After that, I also quickly started using such weapons, which would stop the movement of the opposition in the battlefield. My and Parshuram's arrows spread everywhere in the sky and stopped in the middle. 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)