Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.180.23: तब मैंने जमदग्निनन्दन परशुरामजी की ओर पुनः बाण चलाया, जो काली अग्नि के समान प्रज्वलित हो रहा था और उन्हें मार डालने की इच्छा से चमक रहा था॥23॥   |   mahabharat अध्याय 5.180: भीष्म और परशुरामका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 180: भीष्म और परशुरामका घोर युद्ध  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.180.23 
तत: पुन: शरं दीप्तं सुप्रभं कालसम्मितम्।
असृजं जामदग्न्याय रामायाहं जिघांसया॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तब मैंने जमदग्निनन्दन परशुरामजी की ओर पुनः बाण चलाया, जो काली अग्नि के समान प्रज्वलित हो रहा था और उन्हें मार डालने की इच्छा से चमक रहा था॥23॥
 
Then I again shot an arrow towards Jamadagninandan Parshuram, burning like a black fire and shining brightly with the desire to kill him. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)