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mahabharat 5.180.16-17: हे भरतश्रेष्ठ! परशुराम के बाणों से उत्पन्न हुई भयंकर पीड़ा से मैं अत्यन्त व्याकुल हो गया। मैं अत्यन्त घायल और अचेत होकर युद्धभूमि से दूर चला गया। भरत! मुझे इस अवस्था में देखकर परशुराम के सेवक, जैसे अकृतव्रण और काशीराज की पुत्री अम्बा, सभी अत्यन्त प्रसन्न हुए और कोलाहल करने लगे। 16-17।   |   mahabharat अध्याय 5.180: भीष्म और परशुरामका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 180: भीष्म और परशुरामका घोर युद्ध  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  5.180.16-17 
ग्लायन्तं भरतश्रेष्ठ रामबाणप्रपीडितम्।
ततो मामपयातं वै भृशं विद्धमचेतसम्॥ १६॥
रामस्यानुचरा हृष्टा: सर्वे दृष्ट्वा विचुक्रुशु:।
अकृतव्रणप्रभृतय: काशिकन्या च भारत॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! परशुराम के बाणों से उत्पन्न हुई भयंकर पीड़ा से मैं अत्यन्त व्याकुल हो गया। मैं अत्यन्त घायल और अचेत होकर युद्धभूमि से दूर चला गया। भरत! मुझे इस अवस्था में देखकर परशुराम के सेवक, जैसे अकृतव्रण और काशीराज की पुत्री अम्बा, सभी अत्यन्त प्रसन्न हुए और कोलाहल करने लगे। 16-17।
 
O best of the Bharatas! I was very distressed due to the severe pain caused by Parashurama's arrows. I was badly wounded and unconscious and moved away from the battlefield. Bharata! Seeing me in this condition, Parashurama's servants like Akritavrana and Amba, the daughter of the King of Kashi, all of them became very happy and started making noise. 16-17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)