श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 179: संकल्पनिर्मित रथपर आरूढ़ परशुरामजीके साथ भीष्मका युद्ध प्रारम्भ करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.179.31 
हेमन्तान्तेऽशोक इव रक्तस्तबकमण्डित:।
बभौ रामस्तथा राजन् प्रफुल्ल इव किंशुक:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
राजन ! जैसे वसन्त ऋतु में अशोक वृक्ष और लाल पुष्पों से युक्त पलाश वृक्ष शोभायमान होते हैं, वैसे ही परशुराम जी भी शोभायमान थे ॥31॥
 
King! Just as the Ashoka tree and the blooming Palash tree look beautiful with bunches of red flowers in the spring season, Parashurama also looked equally beautiful. ॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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