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श्लोक 5.179.2  |
आरोह स्यन्दनं वीर कवचं च महाभुज।
बधान समरे राम यदि योद्धुं मयेच्छसि॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| "महाबाहो! वीर राम! यदि तुम मेरे साथ युद्धभूमि में युद्ध करना चाहते हो, तो रथ पर चढ़ो और कवच भी धारण करो।"॥2॥ |
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| "Mahabaho! Brave Rama! If you wish to fight with me on the battlefield, then get on the chariot and wear the armour as well."॥2॥ |
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