श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 179: संकल्पनिर्मित रथपर आरूढ़ परशुरामजीके साथ भीष्मका युद्ध प्रारम्भ करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.179.10 
आह्वयान: स मां युद्धे मनो हर्षयतीव मे।
पुन: पुनरभिक्रोशन्नभियाहीति भार्गव:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भृगु नन्दन राम बार-बार मुझे “आओ, आओ” कहकर पुकार रहे थे और युद्ध के लिए मेरा आह्वान कर रहे थे, इस प्रकार मेरे मन को आनन्द और उत्साह से भर रहे थे॥10॥
 
Bhrigu Nandan Rama was repeatedly calling me saying, "Come, come" and was invoking me for the battle, thus filling my mind with joy and enthusiasm. ॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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