श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 179: संकल्पनिर्मित रथपर आरूढ़ परशुरामजीके साथ भीष्मका युद्ध प्रारम्भ करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.179.1 
भीष्म उवाच
तमहं स्मयन्निव रणे प्रत्यभाषं व्यवस्थितम्।
भूमिष्ठं नोत्सहे योद्‍धुं भवन्तं रथमास्थित:॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - हे राजन! तब मैंने युद्ध के लिए खड़े परशुरामजी से हँसकर कहा - 'ब्राह्मण! मैं रथ पर बैठा हूँ और आप भूमि पर खड़े हैं। ऐसी स्थिति में मैं आपसे युद्ध नहीं कर सकता।॥1॥
 
Bhishmaji says - O King! Then I smiled and said to Parshuramji who was standing for the battle - 'Brahmin! I am sitting on the chariot and you are standing on the ground. In such a condition I cannot fight with you.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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