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mahabharat 5.178.6: परशुरामजी बोले- काशीराज की पुत्री! फिर से सोचकर बताओ। यद्यपि भीष्म तुम्हारे लिए पूजनीय हैं, तथापि मेरे कहने पर वे तुम्हारा चरण अपने सिर पर उठा लेंगे।   |   mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.178.6 
राम उवाच
काशिकन्ये पुनर्ब्रूहि भीष्मस्ते चरणावुभौ।
शिरसा वन्दनार्होऽपि ग्रहीष्यति गिरा मम॥ ६॥
 
 
अनुवाद
परशुरामजी बोले- काशीराज की पुत्री! फिर से सोचकर बताओ। यद्यपि भीष्म तुम्हारे लिए पूजनीय हैं, तथापि मेरे कहने पर वे तुम्हारा चरण अपने सिर पर उठा लेंगे।
 
Parshuramji said- Daughter of the King of Kashi! Think again and tell me. Although Bhishma is worship-worthy for you, yet on my saying so he will lift your feet on his head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)