Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.178.50: एक तो आप गुरु हैं। और उससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि आप ब्राह्मण हैं। विशेष बात यह है कि आप तपस्या में निपुण हैं। अतः मैं आप जैसे व्यक्ति का वध कैसे कर सकता हूँ? यही सोचकर मैंने अब तक आपके कठोर व्यवहार को चुपचाप सहन किया है।॥50॥ | mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गुरुं न हन्यां समरे ब्राह्मणं च विशेषत:।
विशेषतस्तपोवृद्धमेवं क्षान्तं मया तव॥ ५०॥
अनुवाद
एक तो आप गुरु हैं। और उससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि आप ब्राह्मण हैं। विशेष बात यह है कि आप तपस्या में निपुण हैं। अतः मैं आप जैसे व्यक्ति का वध कैसे कर सकता हूँ? यही सोचकर मैंने अब तक आपके कठोर व्यवहार को चुपचाप सहन किया है।॥50॥
‘First of all you are a Guru. And more importantly you are a Brahmin. The special thing is that you are an expert in tapasya. So how can I kill a person like you? Thinking this, I have silently tolerated your harsh behaviour till now.॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥