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mahabharat 5.178.31: पुरुषसिंह! आपको कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे इस राजकुमारी को अपने धर्म का पालन करने का अवसर मिले। अनघ! राजाओं का इस प्रकार अपमान करना आपके लिए उचित नहीं है। 31।   |   mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.178.31 
स्वधर्मं पुरुषव्याघ्र राजपुत्री लभत्वियम्।
न युक्तस्त्ववमानोऽयं राज्ञां कर्तुं त्वयानघ॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! आपको कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे इस राजकुमारी को अपने धर्म का पालन करने का अवसर मिले। अनघ! राजाओं का इस प्रकार अपमान करना आपके लिए उचित नहीं है। 31।
 
Purushsingh! You should do something so that this princess gets the opportunity to follow her religion. Anagh! It is not right for you to insult the kings in this manner. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)