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mahabharat 5.178.30: भरत! तुम उसे हरण करके यहाँ लाए हो। इसीलिए शाल्वराज ने उससे विवाह करने से इनकार कर दिया है; अतः मेरी अनुमति से तुम उसे स्वीकार करो।   |   mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.178.30 
प्रत्याख्याता हि शाल्वेन त्वयाऽऽनीतेति भारत।
तस्मादिमां मन्नियोगात् प्रतिगृह्णीष्व भारत॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
भरत! तुम उसे हरण करके यहाँ लाए हो। इसीलिए शाल्वराज ने उससे विवाह करने से इनकार कर दिया है; अतः मेरी अनुमति से तुम उसे स्वीकार करो।
 
Bharata! You kidnapped her and brought her here. That is why Shalvaraj has refused to marry her; hence you accept her with my permission.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)