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mahabharat 5.178.27: मुझे अपने पास आते देख पराक्रमी परशुरामजी ने मेरी पूजा स्वीकार की और इस प्रकार कहा॥27॥   |   mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.178.27 
स मामभिगतं दृष्ट्वा जामदग्न्य: प्रतापवान्।
प्रतिजग्राह तां पूजां वचनं चेदमब्रवीत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
मुझे अपने पास आते देख पराक्रमी परशुरामजी ने मेरी पूजा स्वीकार की और इस प्रकार कहा॥27॥
 
Seeing me coming near him, the mighty Parasurama accepted the worship offered by me and said thus.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)