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श्लोक 5.177.6  |
एतद् विचार्य मनसा भवानेतद् विनिश्चयम्।
विचिनोतु यथान्यायं विधानं क्रियतां तथा॥ ६॥ |
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| अनुवाद |
| इस विषय पर मन में विचार करो और स्वयं ही निर्णय करो तथा जो उचित जान पड़े वही करो ॥6॥ |
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| Think over this matter in your mind and make a decision yourself and do what seems just. ॥ 6॥ |
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