श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.177.6 
एतद् विचार्य मनसा भवानेतद् विनिश्चयम्।
विचिनोतु यथान्यायं विधानं क्रियतां तथा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
इस विषय पर मन में विचार करो और स्वयं ही निर्णय करो तथा जो उचित जान पड़े वही करो ॥6॥
 
Think over this matter in your mind and make a decision yourself and do what seems just. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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