श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.177.39 
भीष्मं जहि महाबाहो यत्कृते दृ:खमीदृशम्।
प्राप्ताहं भृगुशार्दूल चराम्यप्रियमुत्तमम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे महाबाहु भृगुसिंह! आप भीष्म का वध कीजिए, जिनके कारण मुझे इतना दुःख सहना पड़ा है और अत्यंत अप्रिय आचरण करने को विवश होना पड़ा है ॥39॥
 
O mighty-armed Bhrigusimha, please kill Bhishma, because of whom I have suffered such pain and I have been forced to indulge in extremely unpleasant conduct. ॥ 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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