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श्लोक 5.177.35  |
अम्बोवाच
विसर्जिताहं भीष्मेण श्रुत्वैव भृगुनन्दन।
शाल्वराजगतं भावं मम पूर्वं मनीषितम्॥ ३५॥ |
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| अनुवाद |
| अम्बा बोली- हे भृगुपुत्र! मैं शाल्वराज पर मोहित हूँ और बहुत समय से उन्हें पाने की इच्छा रखती हूँ। यह सुनकर भीष्म ने मुझे विदा कर दिया। |
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| Amba said— O son of Bhrigu, I am in love with Shalvaraj and I have been wanting to have him for a long time. On hearing this, Bhishma sent me away. |
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