श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.177.35 
अम्बोवाच
विसर्जिताहं भीष्मेण श्रुत्वैव भृगुनन्दन।
शाल्वराजगतं भावं मम पूर्वं मनीषितम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
अम्बा बोली- हे भृगुपुत्र! मैं शाल्वराज पर मोहित हूँ और बहुत समय से उन्हें पाने की इच्छा रखती हूँ। यह सुनकर भीष्म ने मुझे विदा कर दिया।
 
Amba said— O son of Bhrigu, I am in love with Shalvaraj and I have been wanting to have him for a long time. On hearing this, Bhishma sent me away.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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