श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.177.33 
न चेत् करिष्यति वचो मयोक्तं जाह्नवीसुत:।
धक्ष्याम्यहं रणे भद्रे सामात्यं शस्त्रतेजसा॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
भद्रे! यदि गंगानन्दन भीष्म मेरी बात नहीं मानेंगे तो मैं युद्ध में अपने अस्त्रों की शक्ति से उन्हें उनके मन्त्रियों सहित भस्म कर दूँगा॥33॥
 
Bhadre! If Ganganandan Bhishma does not listen to me, then I will incinerate him along with his ministers with the power of my weapons in the war. 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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