श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.177.32 
राम उवाच
प्रेषयिष्यामि भीष्माय कुरुश्रेष्ठाय भाविनि।
करिष्यति वचो मह्यं श्रुत्वा च स नराधिप:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
परशुरामजी ने कहा- भाविनी! मैं तुम्हें कौरवों में श्रेष्ठ भीष्म के पास भेजूँगा। नरपति भीष्म मेरी आज्ञा सुनते ही उसका पालन करेंगे॥32॥
 
Parshuramji said- Bhavini! I will send you to Bhishma, the best of Kurus. Narapati Bhishma will obey my orders as soon as he hears it. 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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