श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.176.8 
गति: पति: समस्थाया विषमे च पिता गति:।
प्रव्रज्या हि सुदु:खेयं सुकुमार्या विशेषत:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
सुख के समय स्त्री का सहारा उसका पति होता है और संकट के समय पिता का सहारा लेना उसके लिए श्रेयस्कर है। तुम विशेष रूप से कोमल हो, इसलिए यह त्याग (घर छोड़ना) तुम्हारे लिए अत्यंत दुःखदायी है। 8.
 
‘In times of happiness a woman's support is her husband and in times of crisis it is better for her to seek support of her father. You are especially delicate, so this act of renunciation (leaving home) is extremely painful for you. 8.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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