श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  5.176.57 
अम्बोवाच
भगवन्नेवमेवेह यथाऽऽह पृथिवीपति:।
शरीरकर्ता मातुर्मे सृञ्जयो होत्रवाहन:॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
अम्बा बोली - हे प्रभु! मेरी स्थिति ठीक वैसी ही है जैसी मेरे माता के पिता सृंजयवंशी महाराज होत्रवाहन ने कही है ॥57॥
 
Amba said - O Lord! My situation is exactly as my mother's father, Srinjayavanshi Maharaja Hotravahan, has said. ॥ 57॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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