श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  5.176.56 
मया च प्रत्यभिज्ञाता वंशस्य परिकीर्तनात्।
अस्य दु:खस्य चोत्पत्तिं भीष्ममेवेह मन्यते॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
जब से मैंने उसके कुल का ज्ञान प्राप्त किया है, तब से मैं उसे पहचान गया हूँ। वह भीष्म को अपने दुःख का कारण मानती है ॥ 56॥
 
I have recognised her since I have learnt about her family. She considers Bhishma to be the reason for her suffering. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)