श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.176.49 
सत्यवत्यै निवेद्याथ विवाहं समनन्तरम्।
भ्रातुर्विचित्रवीर्यस्य समाज्ञापयत प्रभु:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर बलवान भीष्म ने उन कन्याओं को सत्यवती को सौंप दिया और उसे अपने छोटे भाई विचित्रवीर्य के साथ इनका विवाह करने की अनुमति दे दी ॥49॥
 
Arriving there the powerful Bhishma handed over these girls to Satyavati and gave her permission to marry these girls to his younger brother Vichitravirya. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)