श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  5.176.44-45 
होत्रवाहन उवाच
दौहित्रीयं मम विभो काशिराजसुता प्रिया।
ज्येष्ठा स्वयंवरे तस्थौ भगिनीभ्यां सहानघ॥ ४४॥
इयमम्बेति विख्याता ज्येष्ठा काशिपते: सुता।
अम्बिकाम्बालिके कन्ये कनीयस्यौ तपोधन॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
होत्रवाहन ने कहा—प्रभु! यह मेरी पौत्री (पुत्री की पुत्री) है। अनघ! काशीराज की परमप्रिय ज्येष्ठ कन्या अपनी दो छोटी बहनों के साथ स्वयंवर में उपस्थित थी। उनमें से वह काशीराज की ज्येष्ठ पुत्री अम्बा नाम से प्रसिद्ध है। तपोधन! उसकी दो छोटी बहनें अम्बिका और अम्बालिका कहलाती हैं। 44-45।
 
Hotravahan said— Prabhu! This is my granddaughter (daughter's daughter). Anagh! The most beloved eldest daughter of Kashiraj was present in the swayamvara along with her two younger sisters. Out of them, she is the eldest daughter of Kashiraj known as Amba. Tapodhan! Her two younger sisters are called Ambika and Ambalika. 44-45.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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