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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत
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श्लोक 43
श्लोक
5.176.43
इयं च कन्या राजर्षे किमर्थं वनमागता।
कस्य चेयं तव च का भवतीच्छामि वेदितुम्॥ ४३॥
अनुवाद
राजा! मैं जानना चाहता हूँ कि यह कन्या वन में क्यों आई है? यह किसकी पुत्री है और इसका आपसे क्या सम्बन्ध है?॥ 43॥
King! I want to know why this girl has come to the forest. Whose daughter is she and what relation does she have to you?॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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