श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.176.42 
इह राम: प्रभाते श्वो भवितेति मतिर्मम।
द्रष्टास्येनमिहायान्तं तव दर्शनकाङ्क्षया॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
मुझे पूरा यकीन है कि कल सुबह तक परशुरामजी यहाँ उपस्थित होंगे। वे आपसे मिलने आ रहे हैं। इसलिए आप उनसे यहीं ज़रूर मिलें।
 
I am sure that by tomorrow morning Parshuramji will be present here. He is coming to meet you. So you must meet him here.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)