श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.176.38 
ततस्ते कथयामासु: कथास्तास्ता मनोरमा:।
धन्या दिव्याश्च राजेन्द्र प्रीतिहर्षमुदा युता:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! तत्पश्चात् उन सबका प्रेम और आनन्दपूर्वक दिव्य, मंगलमय और आनन्दमय वार्तालाप होने लगा। 38।
 
Rajendra! Thereafter all of them began to have a divine, blessed and delightful conversation with love and joy. 38.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas