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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत
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श्लोक 31
श्लोक
5.176.31
महेन्द्रं वै गिरिश्रेष्ठं रामो नित्यमुपास्ति ह।
ऋषयो वेदविद्वांसो गन्धर्वाप्सरसस्तथा॥ ३१॥
अनुवाद
परशुरामजी महान् महेन्द्र पर्वत पर सदैव निवास करते हैं। वेदवेत्ता महर्षि, गन्धर्व और अप्सराएँ भी वहीं निवास करती हैं॥31॥
Parshuramji always resides on the great mountain Mahendra. The Veda-knowing Maharshi, Gandharvas and Apsaras also reside there. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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