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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत
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श्लोक 25
श्लोक
5.176.25
गच्छ मद्वचनाद् रामं जामदग्न्यं तपस्विनम्।
रामस्ते सुमहद् दु:खं शोकं चैवापनेष्यति॥ २५॥
अनुवाद
‘मेरी आज्ञा से तुम तपस्वी जमदग्निपुत्र परशुराम के पास जाओ। वे अवश्य ही तुम्हारे महान् दुःख और शोक का निवारण करेंगे।॥ 25॥
‘At my behest, go to Parashurama, the son of Jamadagni, who is devoted to penance. He will surely remove your great sorrow and grief.॥ 25॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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