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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत
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श्लोक 24
श्लोक
5.176.24
दु:खं छिन्द्यामहं ते वै मयि वर्तस्व पुत्रिके।
पर्याप्तं ते मनो वत्से यदेवं परिशुष्यसि॥ २४॥
अनुवाद
‘बेटी! मैं तेरा दुःख दूर कर दूँगा, मेरे पास रह। बेटा! तेरे हृदय में बड़ा क्लेश है, इसीलिए तू इस प्रकार सूख रहा है॥ 24॥
‘Daughter! I will remove your sorrow, stay with me. Son! There is a lot of anguish in your heart, that is why you are drying up like this.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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