श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.176.23 
अब्रवीद् वेपमानश्च कन्यामार्तां सुदु:खित:।
मा गा: पितुर्गृहं भद्रे मातुस्ते जनको ह्यहम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
और अत्यन्त दुःखी और काँपते हुए उस दुःखी कन्या से इस प्रकार बोले - 'सुशील कन्या! यदि तू अपने पिता के घर नहीं जाना चाहती, तो मत जा। मैं तेरी माता का पिता हूँ।॥ 23॥
 
And being very sad and trembling, he said to the distressed girl in this manner - 'Good girl! (If) you do not wish to go to your father's house, then) do not go. I am your mother's father.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)