श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.176.21 
स तामपृच्छत् कात्‍स्‍न्‍‍‍र्येन व्यसनोत्पत्तिमादित:।
सा च तस्मै यथावृत्तं विस्तरेण न्यवेदयत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने उससे उस विपत्ति का सारा हाल पूछा जो उस पर प्रारम्भ से ही आई थी और अम्बना ने भी जो कुछ हुआ था, उसे विस्तारपूर्वक कह ​​सुनाया ॥ 21॥
 
He asked him about all the details regarding the calamity that had befallen him from the very beginning and Ambana also told him in detail about whatever had happened. ॥ 21॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas