श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.176.2 
केचिदाहु: पितुर्वेश्म नीयतामिति तापसा:।
केचिदस्मदुपालम्भे मतिं चक्रुर्हि तापसा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
कुछ तपस्वी कहने लगे कि इस राजकुमारी को इसके पिता के घर भेज देना चाहिए। कुछ तपस्वियों ने मुझे फटकारने का निश्चय किया॥2॥
 
Some ascetics started saying that this princess should be sent to her father's house. Some ascetics decided to rebuke me.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)