श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.176.19 
तां तथावादिनीं श्रुत्वा दृष्ट्वा च स महातपा:।
राजर्षि: कृपयाऽऽविष्टो महात्मा होत्रवाहन:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
पूर्वोक्त प्रकार से विनयपूर्वक अपना दुःख व्यक्त करने वाली राजकुमारी अम्बा के वचन सुनकर महान तपस्वी एवं महाप्रतापी राजा होत्रवाहन को दया आ गई॥19॥
 
Hearing the words of the princess Amba, who was humbly expressing her grief in the aforesaid manner, the great ascetic and great king Hotravahana was moved with pity.॥ 19॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas