यथा परेऽपि मे लोके न स्यादेवं महात्यय:।
दौर्भाग्यं तापसश्रेष्ठास्तस्मात् तप्स्याम्यहं तप:॥ १४॥
अनुवाद
हे महर्षियों! मैं तप करना चाहता हूँ, जिससे मुझे परलोक में ऐसा महान् कष्ट और दुर्भाग्य न झेलना पड़े। अतः मैं अवश्य तप करूँगा॥14॥
O great sages! I want to perform penance so that I do not have to face such a great trouble and misfortune in the next world. Therefore, I will definitely perform penance. ॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥