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श्लोक 5.175.45  |
स तामाश्वासयत् कन्यां दृष्टान्तागमहेतुभि:।
सान्त्वयामास कार्यं च प्रतिजज्ञे द्विजै: सह॥ ४५॥ |
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| अनुवाद |
| तब ऋषि शैखवत्य ने सांसारिक उदाहरणों, शास्त्रों और तर्कों द्वारा उस कन्या को आश्वस्त किया और उसे प्रोत्साहित किया। उन्होंने ब्राह्मणों के साथ मिलकर उसके कार्य को पूरा करने का प्रयत्न करने का वचन दिया। |
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| Then the sage Shaikhavatya assured the girl by worldly examples, sayings of the scriptures and logic and encouraged her. He pledged to make efforts to accomplish her task along with the Brahmins. |
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इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि अम्बोपाख्यानपर्वणि शैखावत्याम्बासंवादे पञ्चसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत अम्बोपाख्यानपर्वमें शैखावत्य तथा अम्बाका संवादविषयक एक सौ पचहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७५॥
[दाक्षिणात्य अधिक पाठके १ १/२ श्लोक मिलकर कुल ४६ १/२ श्लोक हैं।] |
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